नवचेतना फूँक ज़रा

नवचेतना फूँक ज़रा

फिर माता रही पुकार नव चेतना फूँक ज़रा |

उठ फिर भर हुंकार नवचेतना फूँक ज़रा||

झाड़-झंखार खड़े बेईमानी के

उखाड़ ये खर-पतवार नवचेतना फूँक ज़रा||

भीख नहीं हक़ मांग रहा तू

और ज़ोर से ललकार नवचेतना फूँक ज़रा||

रावण मिलते हैं अब इन रूपों में

आतंक,गरीबी औ भ्रष्टाचार नवचेतना फूँक ज़रा||

फिर ला धानी चूनर माँ को पहनाने को

फिर कर नव शृंगार नवचेतना फूँक ज़रा||

 

 

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