अब तो आओ गिरधारी

अब तो आओ गिरधारी

लूट रही द्रौपदी की लाज अब तो आओ गिरधारी |

बिगड़ गए सब काज अब तो आओ गिरधारी||

ऊँची अट्टालिकाओं ने खा ली जगह झोंपड़ी की

दब गई सुदामा की आवाज अब तो आओ गिरधारी ||

बेचारों और लाचारों की अब कोई नही सुनता

भ्रष्ट हुए हैं ताज अब तो आओ गिरधारी ||

ग्राह्य गरीबी के ने जकड़ा हलधर जैसे गज को

कोई न सुनता आज अब तो आओ गिरधारी ||

भूखे पेट सो जाते है बच्चे सुन सपनों की लॉरी

सड़ता सड़कों पे अनाज अब तो आओ गिरधारी||

भार के भविष्य की चिंता नही किसी को आज

हुआ स्वार्थी यह समाज अब तो आओ गिरधारी||

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