विप्लव तान

(1)             विप्लव तान

शत्रु दल की चाल है|

सो आज लहू में उबाल है|

तानी हुई हैं भृकुटिया

तना हुआ कपाल है||

दामिनी दमक रही

आ रहा भूचाल है |

शत्रुदल के सामने

जनसमूह विशाल है||

कामनियाँ ये कमनीय

प्रभात प्रथम पूजनीय

चूड़ियों को छोड़ कर

थाम रही करवाल हैं||

परियों की कहानियाँ

न कहती अब नानियाँ|

पाठ बलिदान के

पढ़ रही जवानियाँ ||

आँच रोम रोम तक |

आवाज पहुँचे व्योम तक |

आज या अरि हंत है

या आत्मा है होम तक||

प्रबुद्ध समृद्ध या बलवान|

धीर वीर  या प्राणवान|

मांग रही है मातृभूमि

आज लोहित्य बलिदान||

अरिदल का काल बन|

तू तांडव की ताल बन|

विप्लव तान सुना रिपु को

विश्व में विशाल बन||

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