नंदिनी

नंदिनी

अपनों के लिए अपनों से दंश सह रही है नंदिनी |

संतान सफल हो इसलिए एकाकी रह रही है नंदिनी ||

बचपन की त्याग कर सभी अल्हड़ अठखेलियाँ

गंगा की तरह शांत ,गंभीर बह रही है नंदिनी ||

नव नीड़-निर्माण -निरत हैं सुत-सुता

उनकी सफलता के आशीर्वचन कह रही है नंदिनी ||

देह जीर्ण हृदय विदीर्ण धारण किया पर धैर्य को

त्याग की प्रतिमूर्ति बन वसुधा सी सब सह रही है नंदिनी||

नंदिनी नाम नारी का जो सबके सुख में सुखी

आरती की लौ बनी मौन में सब कह रही है नंदिनी||

 

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