naheen karate

नहीं करते

यूं दिल के जज्बों को रुसवा कराया नहीं करते||

खत किसी को लिखकर जलाया नहीं करते||

सूरज से भी आँख मिलाने का दम रखते हैं

ये हौंसला हम सब पे मगर नुमाँया नहीं करते||

राज़दान एक हो तो राज बना रहता है

यूँ हाले-दिल सबको बताया नहीं करते||

आँखों में ही जो ठहरे तो शोले हो जाएंगे

पलकों से ये बूंदे गिराया नहीं करते||

ढूंढोगे तो मिलेगा अंधेरे में भी रास्ता

रौशनी के लिए घर किसी का जलाया नहीं करते||

‘उदास’ महफिलों की ज़ीनत है हमारी तबस्सुम

वरना तनहाई में तो कभी मुस्कराया नहीं करते||

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boodhaa himalaya

बूढ़ा हिमालय

बूढ़ा हिमालय रात भर खाँसता रहा|

पासबाँ बनके रात भर जागता रहा||

वादी में बिखरी रहीं चिंगारियाँ

कोई इस आग पर हाथ तापता रहा||

मेरे चमन के कई फूल मुरझाए मगर

मेरा माली बैठकर ताकता रहा||

हैं मेरे पास तालीम के कागजात

मगर इल्म दर-दर की खाक फाँकता रहा|

जुटा लिए कमरे को गरम करने के सामाँ

पास एक बूढ़ा ठंड से कांपता रहा||

हर किसी ने वादे किए रोटी के मगर

कोई बच्चा दर-दर भीख मांगता रहा||

मेरे घर में जब आग लगी ‘उदास’

मेरा पड़ौसी अपनी खिड़की से झाँकता रहा||