Papa

पापा

मेरे बचपन के आँँगन में तेरे लाड़ का साया।
मेरी जि़दग़ी है तेरे प्यार का सरमाया।।
मेरी तोतली बोली को दोहराना तेरा।
मुझे बाहर से आते ही गोद में उठाना तेरा।।
मुझको बाँहों के झूले में झुलाया तूने।
सौ बार सीने से लगाकर सुलाया तूने।।
वो टाॅफी, चाॅकलेट लेकर घर आना तेरा।
मुझको दरवाजे से ही आवाज़ लगाना तेरा।।
मेरी उँगली थामकर चलना सिखाया तूनेे।
मेरी राहों में सदा फूलों को बिछाया तूने।।
अपनी पलकों से चुनकर दर्द के काँटे।
तूने सदा खुशियों के फूल ही बाँटे।।
जि़ंदग़ी जीने का तूने ही पाठ पढ़ाया।
मेरी जि़दग़ी सँवारी ,मुझे आगे बढ़ाया।।
तुझको दे दूँ उपहार में चाँदी सोना।
मग़र तेरे प्यार के आगे सब है बौना।।
लब पर ये ही दुआ,दिल में ये ही तमन्ना।
हर जन्म में तुम मेरे ही पापा बनना।।
डाॅ. सीमा ठाकुर

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